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Wednesday, 26 August 2015

वजन घटाने स्वास्थ्य सुझाव


वजन घटाने स्वास्थ्य सुझाव
 आटा भिगोते ही तुरंत इस्तेमाल
करना चाहिए वरना उसमे ऐसे रासायनिक
बदलाव आते है जो सेहत के लिए बहुत
हानिकारक हो सकते है . ऐसा आयुर्वेद में
स्पष्ट कहा गया है . इसलिए फ्रिज
का इस्तेमाल आटा रखने के लिए ना करे . कुछ
ही दिन में ऐसी आदत बन
जायेगी की जितनी रोटियाँ लगती है
उतना ही आटा भिगोया जाए और इसमें
ज़्यादा समय भी नहीं लगता . ताज़े आते
की रोटियाँ ज़्यादा स्वादिष्ट और
पौष्टिक होती है .

गेहूं के जवारे : पृथ्वी की संजीवनी बूटी

गेहूं के जवारे : पृथ्वी की संजीवनी बूटी

प्रकृति ने हमें अनेक अनमोल नियामतें दी हैं। गेहूं के जवारे उनमें से ही प्रकृति की एक अनमोल देन है। अनेक आहार शास्त्रियों ने इसे संजीवनी बूटी भी कहा है, क्योंकि ऐसा कोई रोग नहीं, जिसमें इसका सेवन लाभ नहीं देता हो। यदि किसी रोग से रोगी निराश है तो वह इसका सेवन कर श्रेष्ठ स्वास्थ्य पा सकता है।

गेहूं के जवारों में अनेक अनमोल पोषक तत्व व रोग निवारक गुण पाए जाते हैं, जिससे इसे आहार नहीं वरन्‌ अमृत का दर्जा भी दिया जा सकता है। जवारों में सबसे प्रमुख तत्व क्लोरोफिल पाया जाता है। प्रसिद्ध आहार शास्त्री डॉ. बशर के अनुसार क्लोरोफिल (गेहूंके जवारों में पाया जाने वाला प्रमुख तत्व) को केंद्रित सूर्य शक्ति कहा है।

गेहूं के जवारे रक्त व रक्त संचार संबंधी रोगों, रक्त की कमी, उच्च रक्तचाप, सर्दी, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, स्थायी सर्दी, साइनस, पाचन संबंधी रोग, पेट में छाले, कैंसर, आंतों की सूजन, दांत संबंधी समस्याओं, दांत का हिलना, मसूड़ों से खून आना, चर्म रोग, एक्जिमा, किडनी संबंधी रोग, सेक्स संबंधी रोग, शीघ्रपतन, कान के रोग, थायराइड ग्रंथि के रोग व अनेक ऐसे रोग जिनसे रोगी निराश हो गया, उनके लिए गेहूं के जवारे अनमोल औषधि हैं। इसलिए कोई भी रोग हो तो वर्तमान में चल रही चिकित्सा पद्धति के साथ-साथ इसका प्रयोग कर आशातीत लाभ प्राप्त किया जा सकता है

Sunday, 16 August 2015

गेहूँ के ज्वारे-

गेहूँ के ज्वारे-
गेहूँ के ज्वारेः एक अनुपम औषधि | रामबाण इलाज | सस्ता और सर्वोत्तम
अमेरिका में जीवन और मरण के बीच जूझते रोगियों को प्रतिदिन चार बड़े गिलास भरकर ज्वारों का रस दिया जाता है। जीवन की आशा ही जिन रोगियों ने छोड़ दी उन रोगियों को भी तीन दिन या उससे भी कम समय में चमत्कारिक लाभ होता देखा गया है। ज्वारे के रस से रोगी को जब इतना लाभ होता है, तब नीरोग व्यक्ति ले तो कितना अधिक लाभ होगा?

हरड़ : एक लाभकारी औषधि

हरड़ : एक लाभकारी औषधि

       हरड़ का काढ़ा त्वचा संबंधी एलर्जी में लाभकारी है। हरड़ के फल को पानी में उबालकर काढ़ा बनाएं और इसका सेवन दिन में दो बार नियमित रूप से करने पर जल्द आराम मिलता है। एलर्जी से प्रभावित भाग की धुलाई भी इस काढ़े से की जा सकती है। इसी तरह, फंगल एलर्जी या संक्रमण होने पर हरड़ के फल और हल्दी से तैयार लेप प्रभावित भाग पर दिन में दो बार लगाएं, त्वचा के पूरी तरह सामान्य होने तक इस लेप का इस्तेमाल जारी रखें। मुंह में सूजन होने पर हरड़ के गरारे करने से फायदा मिलता है।

हरड़ का लेप पतले छाछ के साथ मिलाकर गरारे करने से मसूढ़ों की सूजन में भी आराम मिलता है। इसी तरह, हरड़ का चूर्ण दुखते दांत पर लगाने से भी तकलीफ कम होती है। हरड़ स्वास्थ्यवर्धक टॉनिक होता है जिसके प्रयोग से बाल काले, चमकीले और आकर्षक दिखते हैं। हरड़ के फल को नारियल तेल में उबालकर (हरड़ पूरी तरह घुलने तक) लेप बनाएँ और इसे बालों में लगाएं या फिर प्रतिदिन 3-5 ग्राम हरड़ पावडर एक गिलास पानी के साथ सेवन करें। हरड़ का गूदा कब्ज से राहत दिलाने में भी गुणकारी होता है। इस गूदे को चुटकीभर नमक के साथ खाएं या फिर 1/2 ग्राम लौंग अथवा दालचीनी के साथ इसका सेवन करें।

सेहत के लिए गुणकारी मीठे अमरूद

सेहत के लिए गुणकारी मीठे अमरूद
कच्चे अमरूद को पत्थर पर घिसकर उसका एक सप्ताह तक लेप करने से आधाशीशी (आधे सिर का दर्द) का दर्द समाप्त हो जाता है। यह प्रयोग प्रातःकाल करना चाहिए। अमरूद के ताजे पत्तों का रस 10 ग्राम तथा पिसी मिश्री 10 ग्राम मिलाकर 21 दिन प्रातः खाली पेट सेवन करने से भूख खुलकर लगती है और शरीर सौंदर्य में भी वृद्धि होती है। अमरूद खाने या अमरूद के पत्तों का रस पिलाने से भांग का नशा कम हो जाता है। ताजे अमरूद के 100 ग्राम बीजरहित टुकड़े लेकर उसे ठंडे पानी में 4 घंटे भीगने दीजिए। इसके बाद अमरूद के टुकड़े निकालकर फेंक दें। इस पानी को मधुमेह के रोगी को पिलाने से लाभ होता है। अमरूद के ताजा पत्ते में एक छोटा-सा टुकड़ा कत्था लपेटकर पान की तरह चबाने से मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं। पके हुए अमरूद का 50 ग्राम गूदा, 10 ग्राम शहद के साथ खाने से शरीर में शक्ति व स्फूर्ति बढ़ती है। सुबह-शाम एक अमरूद भोजन के पश्चात खाने से पाचन तंत्र मजबूत होता है। साथ ही चिड़चिड़ापन एवं मानसिक तनाव दूर होता है।

Saturday, 15 August 2015

सेहत और स्वाद एक साथ

सेहत और स्वाद एक साथ
अंजीर एक मधुर फल है जो विभिन्न रूपों में निम्न प्रकार से लाभकारी है - सूखे अंजीर को उबालकर अच्छी तरह पीसकर यदि गले की सूजन या गाँठ पर बाँधा जाए तो शीघ्र ही लाभ होता है। साधारण कब्ज की अवस्था में गरम दूध में सूखे अंजीर उबालकर सेवन करने से प्रातःकाल दस्त साफ आता है। ताजे अंजीर खाकर ऊपर से दूध पीना अत्यंत शक्तिवर्धक एवं वीर्यवर्धक होता है। खून की खराबी में सूखे अंजीर को दूध एवं मिश्री के साथ लगातार एक सप्ताह सेवन करने से खून के विकार नष्ट हो जाते हैं।

मधुमेह रोग में अन्य फलों की तुलना में अंजीर का सेवन विशेष लाभकारी होता है। किसी प्रकार का बाह्य पदार्थ यदि पेट में चला जाए तो उसे निकालने के लिए अंजीर को अधिक मात्रा में सेवन करना उपयोगी होता है। दमे (अस्थमा) की बीमारी में प्रातःकाल सूखे अंजीर का सेवन पथ्यकारी है। क्षय रोग (टी.बी.) में कफ की उत्पत्ति रोकने के लिए ताजे अंजीर खाना फायदेमंद है। श्वेत प्रदर में भी इसका उपयोग गुणकारी है। किसी भी प्रकार के बुखार में खासकर पेट की खराबी से होने वाले बुखार में अंजीर का सेवन हितकर होता है।